केप केनेवरल। मंगल के वातावरण में जीवन के
अवशेषों का पता लगाने के लिए वहां गए अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के
क्यूरियोसिटी रोवर ने अब मंगल से सूर्यग्रहण के अद्भुत नजारे को अपने
कैमरों में दर्ज किया है। टेक्सास के ए एंड एम विश्वविद्यालय के खगोलविद
मार्क लेमन ने बुधवार को एक संवाददाता सम्मेलन के दौरान कहा-‘‘मंगल के
चंद्रमा फोबोस ने सूर्य को ढक लिया और उसकी चमकीली सतह का एक किनारा एक
बेहद बेमिसाल नजारा पेश कर रहा था। क्यूरियोसिटी ने सूर्यग्रहण के आंशिक
नजारे को कैद करने में सफलता हासिल की।’’ क्यूरियोसिटी ने गत गुरुवार को
हुए इस सूर्यग्रहण के नजारे को कैद करने के लिए अपने कैमरों पर सुरक्षा
प्रदान करने वाले फिल्टर लगाए और उसके बाद अपना रुख आसमान की ओर मोड़ दिया।
इन फिल्टरों की इस्तेमाल सूर्य की घातक किरणों से क्यूरियोसिटी के नाजुक
उपकरणों को बचाने के लिए किया गया था। इस सूर्यग्रहण की खास बात यह रही कि
मंगल ग्रह के दो चंद्रमा - फोबोस और डेमियोस हैं। पृथ्वी और हमारे चंद्रमा
की दूरी के बनिस्पत ये दोनों ही चंद्रमा मंगल ग्रह के बेहद करीब हैं और
इसलिए इस सूर्यग्रहण का नजारा बेहद कम समय के लिए ही कायम रहा। फोबोस को
मंगल का चक्कर लगाने में आठ घंटे जबकि डेमियोस को 30 घंटे लगते हैं। पृथ्वी
का चंद्रमा 27.3 दिनों में इसका एक चक्कर पूरा करता है। सूर्यग्रहण की
तस्वीरें खींचने में क्यूरियोसिटी का हाथ बंटाने का काम आठ वर्ष पहले मंगल
की सतह के अध्ययन के लिए भेजे गए दूसरे रोवर अपोरच्युनिटी ने किया जो कि
सूर्यग्रहण के वक्त मंगल के दूसरे किनारे पर मौजूद था। क्यूरियोसिटी ने इस
दौरान सूर्यग्रहण की 600 से अधिक तस्वीरें खींची जिनमें से 100 तस्वीरों
में सूर्यग्रहण स्पष्ट रूप से नजर आ रहा था। इनमें से सब तस्वीरों को
पृथ्वी पर स्थित मिशन कंट्रोल को प्रेषित नहीं किया गया।
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें