'एम' फॉर ममता, मायावती...मनमोहन !
बुधवार, 19 सितंबर, 2012 को 16:56 IST तक के समाचार
18 सितंबर की शाम जब यूपीए सरकार
की एक अहम सहयोगी तृणमूल कांग्रेस ने सरकार से समर्थन वापस लेने की घोषणा
की तो केंद्र सरकार अल्पमत में आ गई.
ममता के मंत्री शुक्रवार को अपने पद से इस्तीफा दे
देंगे, लेकिन ममता ने 72 घंटे की मोहलत देकर सरकार से मोलभाव और जोड़तोड़
की गुंजाईश बरकरार रखी है.'एम' फॉर ममता
ममता बनर्जी ने केंद्र से समर्थन वापस लेकर एक दांव खेला है.
ममता बनर्जी यूपीए-2 सरकार की एक अहम सहयोगी रही हैं, लेकिन उनका केंद्र सरकार से शुरु से खट्टा-मीठा रिश्ता रहा है.
ताज़ा विवाद से पहले भी ममता बनर्जी राष्ट्रपति चुनाव में उम्मीदवारी से लेकर कई बार बढ़ाए गए तेल और डीज़ल की कीमतों को लेकर केंद्र सरकार का सड़क से लेकर संसद तक विरोध कर चुकी हैं.
ममता बनर्जी को इस बात का भी अंदाज़ा है कि बार-बार धमकी देने और फिर कांग्रेस के फैसलों के आगे झुकने के कारण उनकी छवि एक ऐसे नेता की बनती जा रही थी जो सिर्फ बोलने में विश्वास रखती है, करने में नहीं.
इसलिए ममता बनर्जी ने कल समर्थन वापस लेने की घोषणा करते वक्त साफ कहा कि मीडिया में जो उनकी छवि एक ड्रामा करने वाली नेता का बताया जा रहा है वो उससे खुश नही हैं.
'एम' फॉर मुलायम
मुलायल सिंह यादव ने कांग्रेस पार्टी पर लचीला ना होने का आरोप लगाया है.
लेकिन समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव की राजनीति कहीं ना कहीं उत्तरप्रदेश को ध्यान में रखकर होती है.
यूपी के पिछले विधानसभा चुनावों में बहुमत पाने के बाद पार्टी के हौंसले बुलंद हैं और इसकी बानगी गाहे-बगाहे समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अपने बयानों से देते आ रहे हैं.
ताज़ा घटनाक्रम के बाद एसपी अध्यक्ष भी खुलकर सामने आ गए हैं. मुलायम सिंह यादव ने साफ कह दिया है कि वो सरकार में शामिल नहीं होने जा रहे हैं.
इतना ही नहीं मुलायम सिंह यादव मौजूदा हालात के लिए केंद्र की गलत नीतियों को दोषी ठहराया है और पूछा कि सरकार ने आखिर आम लोगों के लिए किया क्या है ?
समाजवादी पार्टी का अगला कदम गुरुवार को होने वाले संसदीय दल की बैठक के बाद लिया जाएगा.
'एम' फॉर मायावती
मायावती का कोई भी कदम एसपी के कदम को देखते हुए होगा.
लेकिन उत्तर प्रदेश में बदले राजनीतिक समीकरण के बाद मायावती का रुख़ क्या होगा इस बारे में कुछ भी कहना मुश्किल है.
हालांकि ये तय है कि बीएसपी कोई भी फैसला लेने से पहले समाजवादी पार्टी के फैसलों पर कड़ी नज़र रखेंगी और चाहेगी कि इस मौके का इस्तेमाल वो कांग्रेस पार्टी से नज़दीकी बनाने में करे.
मायावती को ये भी लगता है कि अगर केंद्र सरकार गिरती है और इन हालातों में आम चुनाव जल्द कराए जाते हैं तो इससे बहुजन समाज पार्टी को कोई खास फायदा नहीं होने वाला है.
हालांकि मायावती का अंतिम फैसला 9 अक्तूबर होने वाली पार्टी की महारैली के बाद ही आएगा.
'एम' फॉर एम करुणानिधि
डीएमके अध्यक्ष एम करुणानिधि 20 सितंबर के भारत बंद में शामिल होने का ऐलान किया है.
डीएमके की इस घोषणा के साथ ही केंद्र के यूपीए गठबंधन के लिए एक और चुनौती का सामना करना पड़ेगा.
20 सितंबर को बुलाए गए इस भारत बंद में जयललिता की एआईएडीएमके भी शामिल होने जा रही है ऐसे में करुणानिधी की पार्टी नहीं चाहेगी कि वो लोगों के खिलाफ़ जाकर केंद्र का समर्थन करे.
हालांकि करुणानिधी ने डीज़ल के दाम बढ़ाने और एफडीआई पर खुलकर कुछ नहीं कहा है लेकिन अंतिम फैसला पार्टी के संसदीय दल की बैठक के बाद लिए जाने की बात की है.
'एम' फॉर मनमोहन
मनमोहन सिंह ने अपने किसी भी फैसले को वापस लेने से मना कर दिया है.
मनमोहन सिंह ने पिछले तीन-चार हफ्तों में ऐसे कई बयान दिए जिससे उनका इरादा साफ झलकता है.
मुद्दा चाहे कोलगेट हो या एफडीआई का उन्होंने साफ-साफ कह दिया है कि ना तो वो इस्तीफा देंगे ना ही इन फैसलों को पलटेंगे.
मनमोहन सिंह के फैसले कितने अटल हैं ये उनके इस बयान से साफ होता है जिसमें उन्होंने कहा था, ''अगर जाना होगा तो लड़ते-लड़ते जाएंगे, हारकर नहीं.''
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें